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ग्लास्गो यूनिवर्सिटी में मेडिकल की सीट मिलने के बावजूद, यूके होम ऑफिस ने क्यों रोक्‍या अफगान छात्रा का वीजा?

· GlobeWire Daily Education Desk · Source: www.theguardian.com

ग्लास्गो यूनिवर्सिटी में मेडिकल की सीट मिलने के बावजूद, यूके होम ऑफिस ने क्यों रोक्‍या अफगान छात्रा का वीजा?

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons

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मुख्य बातेंअफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के दमन और पारिवारिक प्रताड़ना से जूझते हुए एक प्रतिभावान छात्रा सारा (बदला हुआ नाम) ने ग्लासगो यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रवेश हासिल किया था। लेकिन, यूके के होम ऑफिस ने उनके वीजा आवेदन को तीन बार विरोधाभासी कारणों का हवाला देते हुए खा

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के दमन और पारिवारिक प्रताड़ना से जूझते हुए एक प्रतिभावान छात्रा सारा (बदला हुआ नाम) ने ग्लासगो यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रवेश हासिल किया था। लेकिन, यूके के होम ऑफिस ने उनके वीजा आवेदन को तीन बार विरोधाभासी कारणों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।

पृष्ठभूमि और संघर्ष

25 वर्षीय सारा ने पिछले एक दशक में डॉक्टर बनने का सपना देखा था। फरवरी 2021 में उन्हें काबुल यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई के लिए सीट मिली थी, लेकिन कुछ ही महीनों बाद तालिबान ने सत्ता में लौटकर महिलाओं की उच्च शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद उन्होंने अन्य विकल्पों की तलाश की, जिसके तहत यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग्लासगो ने उन्हें अपने स्कूल ऑफ मेडिसिन, डेंट्री एंड नर्सिंग में एक गेटवे कोर्स के लिए प्रवेश की पेशकश की।

इससे पहले, सारा ने काबुल में एक स्कूल में आत्मघाती बम धमाके का सामना किया, जबरन बाल विवाह के पारिवारिक प्रयासों को टाला और पाकिस्तान भागने के दौरान तालिबानी व पाकिस्तानी पुलिस के पहरे से बचते हुए जोखिम भरा सफर तय किया। उन्होंने घर पर ही मेडिकल की किताबें पढ़कर और अपनी लगन से डॉक्टरों के साथ क्लिनिक में रहकर चिकित्सा कौशल सीखने का प्रयास किया।

वीजा अस्वीकृति के विरोधाभासी कारण

यूके के होम ऑफिस (जिसका नेतृत्व गृह सचिव शबाना महमूद कर रही हैं) ने मार्च 2026 में अफ़ग़ानिस्तान और कुछ अन्य देशों के छात्रों के लिए वीजा ब्रेक लागू करने से कुछ ही दिन पहले यह आवेदन प्राप्त किया था। सारा को मिले तीन अस्वीकृति पत्रों में परस्पर विरोधी बातें कही गईं:

  • पहला अस्वीकृति पत्र: होम ऑफिस ने माना कि उनके पास अध्ययन के लिए उचित फंड मौजूद है, लेकिन उन्हें 'सच्चा छात्र' (genuine student) नहीं माना गया।
  • दूसरा अस्वीकृति पत्र: इसमें उन्हें 'सच्चा छात्र' तो स्वीकार किया गया, लेकिन यह कहा गया कि उनके पास उपयुक्त फंड नहीं है।

लंदन स्थित अंग्रेजी शिक्षिका जेन कॉन्वेल और 'सेव अफगान वुमन' समूह की मदद से सारा ने ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिए छात्रवृत्ति (bursaries) का प्रबंध भी कर लिया था। इसके बावजूद, होम ऑफिस के इन निर्णयों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

वर्तमान स्थिति और अनिश्चितताएं

वीजा बार-बार खारिज होने के बाद, सारा ने सुरक्षा कारणों से किसी अन्य देश में अधिक किफायती विषय (अकाउंटिंग और फाइनेंस) की पढ़ाई करना शुरू कर दिया है, क्योंकि वे मेडिकल कोर्स का खर्च उठाने में असमर्थ थीं। हालांकि, उन्होंने डॉक्टर बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा है और वे अभी भी वैज्ञानिक विकास से जुड़ी जानकारी हासिल कर रही हैं।

दूसरी ओर, लेबर पार्टी के सम्मेलन में गृह सचिव शबाना महमूद द्वारा शरणार्थी पुनर्वास मार्ग को फिर से शुरू करने की घोषणा पर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि इस योजना में कई प्रतिबंध हैं और व्यापक पारिवारिक पुनर्मिलन योजना अभी भी निलंबित है।

पाठक क्या सत्यापित कर सकते हैं

  • पाठक इस मामले के मूल विवरण और रिपोर्ट की सत्यता की पुष्टि 'द गार्जियन' (The Guardian) पर प्रकाशित मूल रिपोर्ट के लिंक से कर सकते हैं।
  • यूके होम ऑफिस की वीजा नीतियों, अफगान छात्रों के लिए लागू नियमों और संबंधित आधिकारिक बयानों की जांच ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर की जा सकती है।

[मूल स्रोत लिंक देखें](https://www.theguardian.com/uk-news/2026/oct/29/sara-won-a-prized-place-to-study-medicine-in-glasgow-why-is-the-home-office-blocking-her)

मूल स्रोत पढ़ें: Sara won a prized place to study medicine in Glasgow. Why is the Home Office blocking her?

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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