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दवाओं और मेडिकल उपकरणों की ऊंची कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से किए तीखे सवाल

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दवाओं और मेडिकल उपकरणों की ऊंची कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से किए तीखे सवाल

चित्र: navbharattimes.indiatimes.com — Creative Commons

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मुख्य बातें सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने देश में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की महंगी कीमतों तथा अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले भारी मुनाफे पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से तीखे सवाल करते हुए कहा कि पूरी व्यवस्था कथित तौर पर दवा निर

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देश में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की महंगी कीमतों तथा अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले भारी मुनाफे पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से तीखे सवाल करते हुए कहा कि पूरी व्यवस्था कथित तौर पर दवा निर्माताओं की मदद के लिए क्यों काम कर रही है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन और अन्य मेडिकल सामान के दामों में भारी अंतर मरीजों के साथ अन्याय है।

सुनवाई के दौरान सामने आए मुख्य तथ्य

अदालत में सुनवाई के दौरान कैंसर के इंजेक्शन और सलाइन चढ़ाने वाली ट्यूब जैसी जरूरी चीजों के दामों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस मेडिकल ट्यूब की खुदरा कीमत मात्र 15 रुपये होती है, उसके लिए मरीजों से अस्पतालों में 250 रुपये तक वसूले जाते हैं। अदालत ने सवाल किया कि एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) और खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाली दरों में इतना बड़ा अंतर क्यों है और सरकार इसे क्यों होने दे रही है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्र सरकार द्वारा कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित करने के हालिया फैसले के बावजूद, बाजार की लगभग 90 प्रतिशत दवाएं मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि आयुष्मान भारत योजना जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत पांच लाख रुपये तक का कवरेज मिलने के बाद भी आम परिवारों को भारी-भरकम अस्पताल बिलों का सामना करना पड़ता है।

निजी अस्पतालों की दलील और अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान निजी अस्पतालों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि सरकारी स्वास्थ्य ढांचे पर अत्यधिक दबाव है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए भारी खर्च उठाना पड़ता है और दवाओं पर मुनाफा कम होने से उनका संचालन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अस्पताल अपने खर्च अन्य तरीकों से भी चला सकते हैं।

क्या है अनिश्चित और पुष्ट पहलू

  • पुष्ट जानकारी: सुप्रीम कोर्ट ने गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण, जेनेरिक दवाएं लिखना अनिवार्य करने और मेडिकल उपकरणों के मुनाफे की वैधानिक सीमा तय करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसके अलावा, अदालत ने एसिड अटैक की घटनाओं पर भी संज्ञान लेते हुए खुले बाजार में एसिड की आसान उपलब्धता पर केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा है।
  • अज्ञात/लंबित पहलू: दवाओं को मूल्य नियंत्रण आदेश के दायरे में पूरी तरह से लाने और भविष्य की विनियामक नीतियों पर अंतिम निर्णय अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

पाठक कैसे सत्यापित करें

पाठक इस मामले से जुड़ी विस्तृत और आधिकारिक जानकारी नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर उपलब्ध रिपोर्ट के माध्यम से देख सकते हैं। मूल समाचार और आधिकारिक घोषणा की पुष्टि के लिए इस लिंक पर विजिट किया जा सकता है: [नवभारत टाइम्स रिपोर्ट](https://navbharattimes.indiatimes.com/legal/supreme-court-questions-high-medicine-prices-and-hospital-margins-seeks-stronger-controls-on-drugs-and-medical-devices/articleshow/135248639.cms)।

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