UK में उच्च-स्तरीय छात्र आवास (PBSA) के ढहने से छात्रों में असमंजस, बाजार में संकट
· GlobeWire Daily Education Desk · Source: www.theguardian.com

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons
ब्रिटेन में छात्र आवास बाजार का संकट
ब्रिटेन में उच्च-स्तरीय और आधुनिक छात्र आवास (पर्पज-बिल्ट स्टूडेंट अक्कमोडेशन यानी PBSA) प्रदान करने वाली कुछ कंपनियों के अचानक दिवालिया होने से शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में छात्रों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिम, सिनेमा और रूफटॉप टेरेस जैसी सुविधाओं वाले इन महंगे स्टूडियो फ्लैट्स और टावर ब्लॉक को अक्सर अंतरराष्ट्रीय और समृद्ध छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। हालांकि, लागत बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में गिरावट के कारण इनमें से कई परिसरों को भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
प्रभावित छात्रों की मुश्किलें और अनिश्चितताएं
स्कॉटलैंड के एबर्टे यूनिवर्सिटी में गेम डिज़ाइन के चौथे वर्ष के छात्र नथाली श्रीविबूनरट्टान इसका एक उदाहरण हैं। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जब वह थाईलैंड में अपने परिवार के साथ थीं, तब उन्हें पता चला कि उनके स्कॉटिश स्टूडियो फ्लैट (मार्केटगेट अपार्टमेंट्स) के मालिक अचानक दिवालिया हो गए हैं। डंडी शहर में स्थित इस 116 कमरों वाले ब्लॉक के बंद होने से वहां रहने वाले लगभग 70 छात्रों को जुलाई के अंत में अचानक दूसरी जगह तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा। श्रीविबूनरट्टान को अपना सामान दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए £850 खर्च करने पड़े।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक स्थिति से जुड़ा है।
मुख्य कारण और बाजार की स्थिति
उद्योग के विश्लेषकों और आवास विशेषज्ञों के मुताबिक, इस संकट के पीछे कई कारण हैं:
- बढ़ती लागत और कर्ज: निर्माण और रख-रखाव की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय छात्रों (विशेषकर चीन से आने वाले छात्रों) की संख्या में स्थिरता या गिरावट आई है।
- किराए और लोन में अंतर: ब्रिटिश छात्रों के लिए मिलने वाले मेंटेनेंस लोन (रखरखाव ऋण) और PBSA के महंगे किराए के बीच बहुत बड़ा अंतर आ गया है। ब्रिटेन के अधिकांश छात्र औसतन £160 प्रति सप्ताह खर्च करने में सक्षम हैं, जबकि नए PBSA प्रोजेक्ट्स को आर्थिक रूप से viable रखने के लिए £300 प्रति सप्ताह तक का किराया जरूरी माना जा रहा है।
- कम ऑक्यूपेंसी (रहने वाले छात्रों की कमी): लंदन के बाहर, विशेषकर कोवेंट्री, लीड्स और नॉटिंघम जैसे शहरों में ऐसे आवासों की अधिकता (oversupply) हो गई है और कई कमरे खाली पड़े हैं।
यूनिवर्सिटी कॉलेज बर्मिंघम के छात्र और यूसीबी गिल्ड ऑफ स्टूडेंट्स के शिक्षा अधिकारी सोहम चौगुले ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए काम करने के घंटे सीमित (सप्ताह में 20 घंटे) होने के कारण वे इतने महंगे PBSA का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
व्यावहारिक निहितार्थ और आगे क्या?
इस संकट से निपटने के लिए कई PBSA संचालक अपने परिसरों के कुछ हिस्से युवा पेशेवरों या शॉर्ट-स्टे होटल के रूप में किराए पर देने की योजना बना रहे हैं। वहीं, नेशनल यूनियन ऑफ स्टूडेंट्स (NUS) के उच्च शिक्षा उपाध्यक्ष लेविस विल्सन ने कहा है कि पूरा छात्र वित्त और ऋण प्रणाली टूटी हुई है, जिसके कारण कुछ छात्रों को बेघर होने या फूड बैंकों पर निर्भर रहने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पुष्ट तथ्य बनाम अज्ञात:
- पुष्ट तथ्य: यूके में कुछ PBSA प्रदाताओं का दिवालिया होना, किराए और मेंटेनेंस लोन में अंतर, और कुछ शहरों में खाली पड़े कमरों के आंकड़े द गार्डियन की रिपोर्ट और StuRents तथा Unipol जैसे संगठनों के डेटा द्वारा समर्थित हैं।
- अज्ञात: यह स्थिति भविष्य में क्षेत्रीय आवास बाजारों को दीर्घकालिक रूप से कितना प्रभावित करेगी और नीतिगत स्तर पर इसमें क्या बदलाव किए जाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
मूल स्रोत की जांच कैसे करें: पाठक इस घटना और बाजार के आंकड़ों से जुड़ी मूल रिपोर्ट की पुष्टि 'The Guardian' समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित मूल लेख (शीर्षक: ‘I didn’t know what to do’: collapse of providers of high-end digs leaves students in shock) के माध्यम से कर सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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