हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने फंगस‑संकुलित बटर पैक पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया, मामला एफएसएसएआई को भेजा
· GlobeWire Daily World Desk · Source: timesofindia.indiatimes.com

चित्र: timesofindia.indiatimes.com — Creative Commons
पृष्ठभूमि
जनवरी 2025 में हैदराबाद के सेकुंडराबाद के सैनीकपुरी में एक उपभोक्ता ने अक्षय कल्पा ऑर्गेनिक कुकिंग बटर (₹230) खरीदा। पैकेज खोलते ही बटर में फंगस और अन्य दृश्यमान दूषित पदार्थ दिखे, जिससे वह उत्पाद असुरक्षित माना गया। उपभोक्ता ने रिटेलर को लौटाया, लेकिन स्टाफ द्वारा अनादर और धमकी का सामना किया। इसके बाद उन्होंने निर्माता को कानूनी नोटिस भेजा और एफएसएसएआई व नेशनल डैरी डेवलपमेंट बोर्ड को भी सूचित किया।
उपभोक्ता आयोग का आदेश (9 अक्टूबर 2026)
हैदराबाद के जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्माता और रिटेलर दोनों को सेवा में कमी और अन्यायपूर्ण व्यापार प्रथा के आरोप में दोषी ठहराया। आयोग ने निम्नलिखित आदेश जारी किए:
- दोनों पक्षों को मिलकर ₹230 की खरीद राशि वापस करनी होगी।
- मानसिक कष्ट और असुविधा के लिए कुल ₹1 लाख (प्रत्येक ₹50,000) मुआवजा देना होगा।
- मुकदमे के खर्च के रूप में ₹10,000 भुगतान करना होगा।
- उपभोक्ता कल्याण कोष में कुल ₹1 लाख (प्रत्येक ₹50,000) दंडात्मक क्षतिपूर्ति जमा करनी होगी।
- अनुचित व्यापार प्रथा को रोकने के लिए सेक्शन 39(1)(g) के तहत निर्देश जारी।
- मामला फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) को सेक्शन 90 के तहत भेजा गया, जहाँ 45 दिन के भीतर कार्यवाही करनी होगी।
निर्माता व रिटेलर के तर्क
- रिटेलर ने कहा कि उसने उत्पाद को सील्ड अवस्था में ही बेचा और पैकेजिंग, निर्माण या मार्केटिंग में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
- निर्माता ने 17 मार्च 2025 को जवाब में बताया कि समस्या रिटेलर के ठंडा‑संचालन (कोल्ड चेन) में थी। उन्होंने कहा कि स्टोर का खुला चिलर अनुशंसित तापमान (4 °C से नीचे) नहीं रख पा रहा था, जिससे 3‑4 °C की अतिरिक्त गर्मी बनी।
- निर्माता ने निरीक्षण के बाद स्टोर को बंद चिलर उपयोग करने और स्टाफ को उचित तापमान नियंत्रण की ट्रेनिंग देने की सलाह दी, परन्तु रिटेलर ने इन उपायों को लागू नहीं किया।
न्यायिक निष्कर्ष
आयोग के बेंच (अध्यक्ष वक्कंती नरसिंह राव, सदस्य पी.वी.टी.आर. जवार बाबू, सुमा वला) ने निर्माता के उत्तर को महत्वपूर्ण माना, क्योंकि उसने स्वयं ही स्टोर के ठंडा‑संचालन में कमी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि निर्माता ने बिक्री से पहले उचित भंडारण सुनिश्चित नहीं किया, जबकि रिटेलर ने अनुशंसित तापमान नहीं बनाए रखा।
उपभोक्ता आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला कि फंगस‑संकुलित बटर खाद्य सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन करता है और इसे अनैतिक व्यापार प्रथा माना गया।
व्यावहारिक प्रभाव
- उपभोक्ताओं के लिए – यदि आप समान पैकेज्ड बटर या अन्य फ्रिज‑आधारित उत्पाद खरीदते हैं, तो पैकेज खोलने पर तुरंत दृश्य और गंध की जाँच करें। किसी भी असामान्य फंगस या बदबू को नोट करके रिटेलर को तुरंत सूचित करें।
- रिटेलर के लिए – खुले चिलर के बजाय बंद चिलर का उपयोग अनिवार्य है, और तापमान को 4 °C से नीचे बनाए रखने के लिए नियमित मॉनिटरिंग आवश्यक है।
- निर्माताओं के लिए – वितरण श्रृंखला में ठंडा‑संचालन की निगरानी को अनुबंधीय शर्तों में स्पष्ट करना चाहिए, तथा रिटेलर को अनुपालन न करने पर दायित्व तय करना चाहिए।
- नियामक दृष्टिकोण – एफएसएसएआई इस मामले में अतिरिक्त निरीक्षण कर सकता है, जिससे भविष्य में समान उल्लंघनों पर तेज़ कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी।
क्या ज्ञात है और क्या अनिश्चित है?
- पुष्टि: बटर में फंगस मौजूद था, उत्पाद की निर्माण तिथि 21 दिसंबर 2024, समाप्ति तिथि 19 अप्रैल 2025, और खरीदी की तिथि 28 जनवरी 2025।
- पुष्टि: रिटेलर के चिलर का तापमान अनुशंसित स्तर से 3‑4 °C अधिक था।
- अनिश्चित: फंगस के प्रकार, संभावित स्वास्थ्य प्रभाव, और क्या समान बैच के अन्य पैकेजों में भी दूषितता थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
- अनिश्चित: एफएसएसएआई की आगे की कार्रवाई की प्रकृति (जैसे उत्पाद रीकॉल, जुर्माना) अभी निर्धारित नहीं हुई है।
सत्यापन के तरीके
- उपभोक्ता आयोग के आदेश का मूल दस्तावेज़ हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या सार्वजनिक सूचना पोर्टल पर उपलब्ध हो सकता है।
- केस से संबंधित विवरण टाइम्स ऑफ इंडिया के कानूनी समाचार पृष्ठ पर प्रकाशित हैं: https://timesofindia.indiatimes.com/legal/news/woman-found-fungus-and-visible-contamination-in-a-rs-230-butter-pack-bought-from-a-retail-store-hyderabad-consumer-commission-has-now-ordered-rs-2-lakh-in-damages-and-compensation-and-referred-the-matter-to-fssai-for-action/articleshow/135352385.cms
- एफएसएसएआई की आधिकारिक वेबसाइट (fssai.gov.in) पर “सेक्शन 90” के तहत शिकायत दर्ज कर आप केस की प्रगति देख सकते हैं।
--- स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, 9 अक्टूबर 2026, उपभोक्ता आयोग का आदेश।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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