50 की उम्र में अभिनेता पंकज त्रिपाठी सीख रहे हैं सही तरीके से खाना, जानिए क्या है 'माइंडफुल ईटिंग'
· GlobeWire Daily Lifestyle Desk · Source: www.indiatoday.in

चित्र: www.indiatoday.in — Creative Commons
परिचय
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर इस बात पर तो बहुत ध्यान देते हैं कि हमारी थाली में क्या परोसा गया है, लेकिन हम यह बहुत कम सोचते हैं कि हम खाते कैसे हैं। फोन पर स्क्रॉल करना, टेलीविजन देखना या जल्दी-जल्दी भोजन करना आम बात हो गई है। ऐसे में 'माइंडफुल ईटिंग' (सचेत होकर खाना) पीछे छूट जाती है। प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने 50 वर्ष की उम्र में इस आदत को अपनाना शुरू किया है और उनका मानना है कि यह एक महत्वपूर्ण सीख है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, अभिनेता ने 50 साल की उम्र में माइंडफुल ईटिंग के महत्व को समझने के बारे में खुलकर बात की।
पंकज त्रिपाठी का अनुभव और भारतीय परंपराएं
पंकज त्रिपाठी ने वीडियो में कहा, "मैंने कभी माइंडफुल ईटिंग का अभ्यास नहीं किया था। मैंने अब, 50 वर्ष की उम्र में इसका महत्व सीखा है। मुझे एहसास हुआ है कि खाते समय सचेत रहना कितना जरूरी है।"
अभिनेता के अनुसार, यह प्रथा भारत की उन खाद्य परंपराओं की याद दिलाती है जहाँ भोजन को हमेशा कृतज्ञता और सम्मान के साथ देखा जाता है। उन्होंने बताया कि कैसे हमारी परंपराओं में भोजन के चारों ओर पानी छिड़कना, प्रार्थना करना और खाने से पहले सम्मान देना शामिल है, जो एक तरह से पूजा के रूप में है। पिछले एक महीने से वे अपने भोजन में करीब आधा घंटा बिता रहे हैं और हर बाइट का आनंद ले रहे हैं।
माइंडफुल ईटिंग क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन के प्रति सचेत रहने से भोजन के साथ हमारा रिश्ता बदल सकता है:
- पोषण और संतुष्टि: सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने भोजन के दौरान फोन और अन्य विकर्षणों को दूर रखने पर जोर दिया है। इससे बेहतर खाद्य विकल्प चुनने में मदद मिलती है और भोजन के बाद पूर्ण संतुष्टि का अहसास होता है।
- बेहतर पाचन: धीरे-धीरे खाने और भोजन को अच्छी तरह चबाने से पाचन क्रिया को समर्थन मिलता है।
- विकर्षणों से मुक्ति: दिल्ली स्थित लाइफस्टाइल कोच और योग प्रशिक्षक लक्षिका वैद्य के अनुसार, जब हम खाने की प्रक्रिया के प्रति जागरूक होते हैं, तो हम भोजन को ठीक से चबाते हैं, शरीर की वास्तविक जरूरत को समझते हैं और अधिक खाने (overeating) से बचते हैं।
व्यवहारिक निहितार्थ और पाठक कैसे शुरुआत कर सकते हैं
माइंडफुल ईटिंग के लिए किसी बड़े जीवनशैली बदलाव की आवश्यकता नहीं है। इसे कुछ सरल आदतों से शुरू किया जा सकता है:
- फोन को दूर रखें: खाते समय सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या संदेशों का जवाब देने से बचें।
- धीमी गति अपनाएं: बिना जल्दबाजी के अपना भोजन खत्म करने के लिए पर्याप्त समय दें।
- स्वाद का आनंद लें: भोजन के स्वाद, बनावट और महक पर ध्यान दें।
- ठीक से चबाएं: जल्दबाजी में भोजन निगलने से बचें।
- शरीर की सुनें: ऑटोपायलट पर खाने के बजाय अपनी भूख और पेट भरने के संकेतों को समझें।
निष्कर्ष और सत्यापन
यह लेख पूरी तरह से FSSAI के वीडियो और 'इंडिया टुडे' पर प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है। पाठक मूल विवरण और अपडेट के लिए FSSAI के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज और इंडिया टुडे की मूल रिपोर्ट को देख सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
और पढ़ें
GlobeWire Daily पर चर्चित खबरें
हालिया खबरों और संबंधित विषयों पर आधारित चयन; लाइव सर्च रैंकिंग नहीं।
UBCF‑GGP का 2026 पिंक बैग अभियान: 13,500 पैकेजों से कैंसर रोगियों को समर्थन
शर्मिला ने बेटी की शादी का स्थल बदला, भाई जगन की सुरक्षा चिंता के कारण
Hong Kong Sixes: भारत-यूएई मैच के दौरान गेंद लगने से अंपायर मैदान पर गिरे
र Ravindra Jadeja के वनडे भविष्य पर चर्चा, Pujara और Nayar की अलग-अलग राय
मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारत के सबसे बड़े आईपीओ के बाद हासिल किया दूसरा स्थान
रugby लीग विश्व कप: ऑस्ट्रेलिया ने कुक आइलैंड्स को 66-6 से हराया


