केंद्र के प्रस्तावित मूल्य नियंत्रण से कैंसर की दवाएं हो सकती हैं 70% तक सस्ती
· GlobeWire Daily Science Desk · Source: news.abplive.com

चित्र: Devyani Nautiyal — Creative Commons
भारत में कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का अनुमान है कि इस कदम से दवाओं की कीमतों में 20 से 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है और मरीजों को सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामा
औषधि विभाग (Department of Pharmaceuticals) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, यह निर्णय विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा और affordability (किफायतीपन) तथा उपलब्धता पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन के बाद लिया गया है। इस प्रस्तावित कदम का उद्देश्य फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में अत्यधिक मुनाफाखोरी पर रोक लगाना है, साथ ही वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए एक उचित मार्जिन सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति उन दवाओं की पहचान करेगी जिन्हें इस प्रस्तावित दायरे में लाया जाएगा। समिति को 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है।
आगे की प्रक्रिया और एनपीपीए की भूमिका
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें मिलने के बाद, राष्ट्रीय औषधीय मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA - National Pharmaceutical Pricing Authority) इन पर विचार करेगा और उचित निर्देश जारी करेगा। इसके बाद संशोधित कीमतों को अधिसूचित किया जाएगा और निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाएगा कि इसका लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचे।
यह हलफनामा डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा दायर एक जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें दवा की कीमतों और फार्मास्युटिकल उद्योग में ट्रेड मार्जिन के प्रभावी विनियमन की आवश्यकता पर चिंता जताई गई थी।
व्यावहारिक निहितार्थ और तुलना
सरकार ने अपने 2019 के एक फैसले को इसका आधार बनाया है, जब एनपीपीए ने 42 चुनिंदा गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर 30% ट्रेड मार्जिन कैप लगाया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस कदम से 526 ब्रांडों के MRP में कमी आई थी और मरीजों को सालाना लगभग 984 करोड़ रुपये की बचत हुई थी।
हालांकि, उद्योग संघों ने चिंता जताई है कि इस दायरे को बढ़ाने से दूरदराज के क्षेत्रों में रोजगार और दवा वितरण पर असर पड़ सकता है, जहां छोटी फर्में स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा, कम कीमत वाली दवाओं, विशेष भंडारण की आवश्यकता वाले उत्पादों और सीमित मांग वाली दवाओं के लिए उच्च मार्जिन की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा जा रहा है ताकि उनकी उपलब्धता प्रभावित न हो।
पाठक क्या सत्यापित कर सकते हैं और अनिश्चितताएं
क्या पुष्ट है:
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है।
- एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है जो अपनी रिपोर्ट 10-15 दिनों में सौंपेगी।
- NPPA समिति की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अंतिम मूल्य अधिसूचना जारी करेगा।
क्या अज्ञात है:
- विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट में कौन-सी विशिष्ट दवाएं शामिल होंगी, यह अभी तय होना बाकी है।
- नई दरें आधिकारिक रूप से कब लागू होंगी, इसकी कोई निश्चित अंतिम तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
पाठक इस मामले की अधिक जानकारी के लिए एबीपी लाइव की मूल रिपोर्ट ( ABP Live News) और आधिकारिक सरकारी विज्ञप्तियों की जांच कर सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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