अमेरिका में इलेक्ट्रिक फेरियों का नया दौर: प्रदूषण घटाने और यातायात सुधारने की दिशा में कदम
· GlobeWire Daily Climate Desk · Source: www.theguardian.com

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons
पारंपरिक डीजल से चलने वाली फेरियों के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक जहाजों का उपयोग तेजी से चर्चा में है। अमेरिकी जलमार्गों में प्रदूषण कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए इस तकनीक को अपनाया जा रहा है। न्यूयार्क हार्बर से लेकर सैन फ्रांसिस्को तक, परिवहन एजेंसियों द्वारा इलेक्ट्रिक जहाजों के बेड़े को शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है।
हाइड्रोफाइल तकनीक और ऊर्जा दक्षता
पारंपरिक जहाजों के मुकाबले इलेक्ट्रिक नौकाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती पानी का प्रतिरोध (ड्रैग) और बैटरियों का भारी वजन होता है। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कंपनियां 'हाइड्रोफाइल' तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इन जहाजों में पानी के भीतर 'विंग्स' या पंख होते हैं, जो गति बढ़ने पर नाव के हल (तले) को पानी की सतह से ऊपर उठा देते हैं।
वेसेव (Vessev) नामक कंपनी के मुख्य कार्यकारी एरिक लाकमान के अनुसार, यह डिज़ाइन ड्रैग को लगभग 66% तक कम कर देता है। इससे जहाजों को छोटे बैटरी पैक ले जाने की अनुमति मिलती है, जिससे वजन और लागत दोनों कम होते हैं। स्टॉकहोम में कैंडेला (Candela) जैसी कंपनियां भी ऐसे इलेक्ट्रिक हाइड्रोफाइल फेरियों का संचालन कर रही हैं, जो पारंपरिक जहाजों की तुलना में ऊर्जा की खपत को काफी हद तक कम करती हैं।
सैन फ्रांसिस्को में इलेक्ट्रिक फेरियों का विस्तार
सैन फ्रांसिस्को में सबसे बड़े फेरी ऑपरेटर का बेड़ा वर्तमान में पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है, जिसमें 18 जहाज शामिल हैं। हालांकि, एजेंसी अगले दो वर्षों में चार बैटरी चालित फेरियां शामिल करने की तैयारी कर रही है। यह लगभग आधा अरब डॉलर के इलेक्ट्रिक ओवरहाल का हिस्सा है, जिसमें डॉक पर चार्जिंग बुनियादी ढांचा भी शामिल है। सैन फ्रांसिस्को में शुरुआती तौर पर हाइड्रोफाइल नौकाओं का उपयोग नहीं किया जाएगा, लेकिन एजेंसी का कहना है कि ये नई नावें अमेरिका में पहली उच्च गति वाली, पूरी तरह से इलेक्ट्रिक फेरियां होंगी।
व्यावहारिक प्रभाव और चुनौतियां
परिवहन क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत है। सड़क वाहनों के अलावा, जहाज भी जीवाश्म ईंधन जलाते हैं। डीजल फेरियों को इलेक्ट्रिक जहाजों से बदलने से व्यस्त तटों के पास उत्सर्जन कम हो सकता है। हालांकि, इस बदलाव में कई चुनौतियां भी हैं:
- चार्जिंग और समय सारणी: फेरियों को तय समय पर चलना होता है, इसलिए बैटरियों को पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करनी होगी और टर्मिनल पर रुकने के दौरान तेजी से चार्ज होना होगा।
- प्रारंभिक लागत: बैटरी चालित फेरियों और चार्जिंग उपकरणों में प्रारंभिक निवेश अधिक होता है, हालांकि लंबे समय में ईंधन और रखरखाव की लागत कम हो सकती है।
- मार्ग की उपयुक्तता: लंबी दूरी, तंग शेड्यूल और सीमित चार्जिंग के अवसर हर मार्ग को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक जहाज के लिए उपयुक्त नहीं बनाते हैं।
पाठकों के लिए जानकारी और सत्यापन
पाठक मूल रिपोर्ट और आधिकारिक विवरण की पुष्टि 'द गार्जियन' पर प्रकाशित मूल लेख (https://www.theguardian.com/environment/2026/oct/29/us-electric-ferries) के माध्यम से कर सकते हैं। रिपोर्ट में उल्लेखित आंकड़े जैसे सैन फ्रांसिस्को में यात्रियों की संख्या (लगभग 3.5 मिलियन प्रति वर्ष) और वेसेव तथा सैन फ्रांसिस्को अधिकारियों के बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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