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ग्लोबल पीसा (PISA) अध्ययन: फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स समेत यूरोप के प्रमुख देशों में शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट

· GlobeWire Daily Education Desk · Source: www.theguardian.com

ग्लोबल पीसा (PISA) अध्ययन: फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स समेत यूरोप के प्रमुख देशों में शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons

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मुख्य बातेंहाल ही में जारी 2025 के वैश्विक पीसा (PISA) के परिणामों ने पश्चिमी यूरोप के प्रमुख शिक्षा पावरहाउसों में चिंता बढ़ा दी है। इस अध्ययन के अनुसार, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और फिनलैंड जैसे देशों में 15 वर्ष के छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

हाल ही में जारी 2025 के वैश्विक पीसा (PISA) के परिणामों ने पश्चिमी यूरोप के प्रमुख शिक्षा पावरहाउसों में चिंता बढ़ा दी है। इस अध्ययन के अनुसार, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और फिनलैंड जैसे देशों में 15 वर्ष के छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि इन देशों में लगभग हर तीसरा छात्र बुनियादी कार्यात्मक साक्षरता और गणितीय कौशल की कमी से जूझ रहा है।

पीसा (PISA) अध्ययन क्या है और इसके मुख्य बिंदु

पीसा (PISA) परीक्षण यह आंकलन करता है कि 15 वर्ष के बच्चे स्कूल में सीखी गई जानकारी और कौशलों को पठन, गणित और विज्ञान के क्षेत्र में वास्तविक जीवन की स्थितियों में कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार महाद्वीप में यह गिरावट 2018 से जारी है। हालांकि इंग्लैंड इस प्रवृत्ति से अलग रहा, लेकिन महाद्वीप के कई हिस्सों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  • फ्रांस: फ्रांस के ताज़ा परिणाम अब तक के सबसे खराब रहे हैं। शिक्षा मंत्री एडवर्ड गेफ्रे ने इसे चिंताजनक करार दिया है।
  • जर्मनी: जर्मनी के छात्रों का यह सबसे खराब पीसा रिपोर्ट कार्ड है, जिससे एक बार फिर शिक्षा प्रणाली, सामाजिक एकीकरण और धन के अंतर को पाटने पर बहस छिड़ गई है।
  • नीदरलैंड्स: यहाँ पठन साक्षरता में रिकॉर्ड गिरावट आई है। अब लगभग 39% 15 वर्षीय युवा आधुनिक समाज में नेविगेट करने के लिए आवश्यक बुनियादी कौशल से वंचित हैं।
  • फिनलैंड: कभी शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक अगुआ रहे फिनलैंड में भी औसत परिणाम 2022 की तुलना में गणित और पठन में कम हुए हैं।

गिरावट के प्रमुख कारण

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई गहरे कारण हैं। महामारी के दौरान हुई पढ़ाई की क्षति ने इस प्रक्रिया को और तेज़ किया, लेकिन इसके मूल में अन्य संरचनात्मक समस्याएँ हैं:

  • शिक्षक की कमी: स्कूलों में लगातार शिक्षकों की कमी और गैर-योग्य कर्मचारियों द्वारा रिक्तियों को भरना।
  • स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग: लगातार स्क्रीन के इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता (attention span) में भारी कमी आई है और 'डीप रीडिंग' की आदत कमजोर हुई है।
  • सामाजिक-आर्थिक असमानता: विशेष रूप से जर्मनी जैसे देशों में पारिवारिक पृष्ठभूमि और शैक्षणिक सफलता के बीच गहरा संबंध देखा गया है, जहाँ कम आय वाले परिवारों के केवल 2% छात्र ही उच्च स्तर की क्षमता प्राप्त करते हैं।

व्यावहारिक निहितार्थ और आगे की स्थिति

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि समस्या केवल अस्थायी नहीं बल्कि एक संरचनात्मक चुनौती बन चुकी है। विभिन्न देशों की सरकारों और शिक्षा मंत्रालयों ने इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देने और बच्चों को बचाने के लिए नए उपायों की घोषणा करने का वादा किया है। शिक्षकों के संगठनों ने अत्यधिक कार्यभार और नीतिगत बदलावों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

पाठक कैसे सत्यापित करें

इस विषय से जुड़ी आधिकारिक रिपोर्ट और अधिक जानकारी के लिए पाठक द गार्डियन की मूल रिपोर्ट का अवलोकन कर सकते हैं।

मूल स्रोत पढ़ें: European education powerhouses rocked by falling scores in global study

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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