सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित 16 वर्षीय छात्र ने आई-ट्रैकिंग तकनीक की मदद से पास कीं जीसीएसई परीक्षाएं
· GlobeWire Daily Education Desk · Source: www.theguardian.com

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons
चे Cheshire के मैकल्सफील्ड स्थित फैलिब्रोम एकेडमी के 16 वर्षीय छात्र पैट्रिक मैकेब ने अपनी असाधारण मेहनत और आई-ट्रैकिंग तकनीक के सहारे अपने जीसीएसई (GCSE) की परीक्षाएं सफलतापूल्र्वक पास कर ली हैं। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित पैट्रिक को अपनी परीक्षाएं पूरी करने में चार महीने का समय लगा। उनकी इस सफलता को विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं और विकलांगता (SEND) प्रणाली की क्षमताओं और सीमाओं के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
स्विट्जरलैंड में जन्मे पैट्रिक जब छह साल के थे, तब उनका परिवार इंग्लैंड वापस आ गया था। इसके बाद से उन्होंने स्थानीय मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ाई की। ऑगमेंटेटिव और अल्टरनेटिव कम्युनिकेशन (AAC) डिवाइस का उपयोग करते हुए, पैट्रिक ने बताया कि स्कूल का अनुभव कुल मिलाकर अच्छा रहा है। उन्होंने कहा, "सबसे अच्छी बात यह रही कि अपने बड़े भाइयों की तरह मैं भी सीख पाया, कौशल विकसित कर पाया और अपने आसपास की दुनिया का ज्ञान प्राप्त कर सका।"
चुनौतियों भरा सफर और परीक्षाओं की लंबी प्रक्रिया
पैट्रिक के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। सामान्य छात्रों की तरह परीक्षा देने के बजाय, पैट्रिक की परीक्षाएं 2 फरवरी को शुरू हुईं और 5 जून तक हर सुबह चलती रहीं। एक 30-अंकों के प्रश्न को हल करने में छह घंटे तक का समय लग सकता था। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें 'कैंडल' (CandLE) नामक संगठन का सहयोग मिला, जो यूके में एएसी तकनीक का उपयोग करने वाले छात्रों की मदद करता है। अत्यधिक मानसिक और शारीरिक थकान के बावजूद, पैट्रिक ने अपने सभी सात जीसीएसई विषयों में सफलता हासिल की और अब वे ए-लेवल (फ्रेंच, बिजनेस और मीडिया स्टडीज) की पढ़ाई कर रहे हैं।
स्कूल के प्रधानाध्यापक रॉस मार्टलैंड और पैट्रिक की मां जो (Jo) ने परीक्षा बोर्डों के साथ संघर्ष किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अन्य छात्रों के समान अवसर मिल सकें। प्रधानाध्यापक मार्टलैंड सरकार की 'SEND' सुधार योजनाओं का समर्थन करते हैं, जिसके तहत बच्चों को विशेष स्कूलों के बजाय स्थानीय स्कूलों में ही आवश्यक विशेषज्ञता और सहायता के साथ रखने की योजना है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इसे उचित रूप से वित्तपोषित नहीं किया गया, तो यह स्कूलों पर भारी दबाव डाल सकता है।
व्यावहारिक निहितार्थ और आगे की योजनाएं
यह मामला इस बात को उजागर करता है कि विकलांग छात्रों के लिए वर्तमान परीक्षा प्रणाली कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है और इसके लिए व्यापक बदलावों की आवश्यकता है। पैट्रिक का मानना है कि आई-ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग करने वाले शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों का मूल्यांकन अधिक उपयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए ताकि उन्हें अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े। परीक्षा और पढ़ाई के अलावा, पैट्रिक को अभी भी सामाजिक मेलजोल और दोस्ती को लेकर कुछ चिंताएं हैं।
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, पैट्रिक की योजना विश्वविद्यालय में मीडिया की पढ़ाई करने और इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने की है।
पाठक इस घटना और यूके की शिक्षा प्रणाली से जुड़ी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के लिए [द गार्डियन की मूल रिपोर्ट](https://www.theguardian.com/education/2026/oct/02/patrick-mccabe-success-cheshire-reveals-limits-send-tech) देख सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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